कुछ तो होता है दीवाने मे जुनूँ का भी असर
और कुछ लोग भी दीवाना बना देते हैं
- unknown
'किताबों से कभी गुजरो तो यूँ किर्दार मिलते है
गये वक्तों की ज्योढी में खडे कुछ यार मिलते है!'
- गुलजार
आँखों को वीजा नहीं लगता, सपनों की सरहद होती नहीं
बंद आँखों से रोज मै सरहद पार चला जाता हूँ!..
- गुलजार
वो जिंदगी के कडे कोस! याद आता है
तिरी निगाहे करम का घना साया
- फिराक
वो देवदार की टहनी पे रुक गया सा चाँद
हवा चले तो अभी करवटे बदलने लगे
- विमल कृष्ण अश्क
यू न मुरझा कि मुझे खुद पे भरोसा न रहे
पिछले मौसम मे तिरे साथ खिला हूं मै भी
- मजहर इमाम
ये एक अब्र1 का टुकडा कहा कहा बरसे
तमाम दश्त2 ही प्यासा दिखाई देता है
-शकेब जलाली
1 बादल, मेघ 2 जंगल
कोई तहरीर1 मिटाये तो धुआं उठता है
दिल वो भीगा हुआ कागज है कि जलता ही नही
-मुमताज रशीद
1 लिखावट
मैने इस खौफ से बोये नही ख्वाबों के दरख्त
कौन जंगल मे उगे पेड को पानी देगा
- दाराब बानो वफा
जैसा दर्द हो वैसा मंजर होता है
मौसम तो इंसान के अंदर होता है
- आजीज एजाज
गलियो मे वही लडके हाथो मे वही पत्थर
क्या लोग मोहब्बत को हर दौर मे मारेंगे
- अन्वर नदीम
चिराग बन के जले है तुम्हारी महफिल मे
वो जिनके घर में कभी रौशनी नही होती
- नरेश कुमार शाद
बरसात मे तालाब हो जाते है कमजर्फ1
बाहर कभी आपे से समुंदर नही होता
- ऐजाज रहमानी
1 कमीना
फूल मुरझाते है अल्फाज नही मुरझाते
दूर जाना है बुजूर्गो कि दुआ ले जाओ
- शैदा रुमानी
खुशबू कि तरह जीना भी आसान तो नही
फुलो से कतरा कतरा निचोडा गया हूं मै
- नसीम निकहत
मिट्टी भी उठा लेते है टूटे हुये घर की
गिराते हुए लोगो को उठाने नही आते
- अशोक मिजाज
फूल से आशिकी का हुनर सीख ले
तितलिया खुद रुकेंगी सदाये न दे
- बशीर बद्र
शहर वालो की मुहब्बत का मै कायल हूं मगर
मैने जिस हाथ को चूमा वही खंजर निकला से
- अहमद फराज
बुलंदीयो गिरोगे तो टूट जाओगे
जबाँ से अपनी बडा बोल बोलते क्युं हो
- महबूब राही
जुल्म होता था तो जंजीर हिला देते थे
आज तो होंठ हिलाने से भी डर लगता है
- के. आर. ज्या
दो तुन्द1 हवाओ पर बुनियाद है तूफान की
या तुम न हंसी होते या मै न जवा होता
- आरजू लखनवी
1 तीक्ष्ण, उग्र, उत्कट
घर से मास्जिद है बहुत दूर, चलो यू कर ले
किसी रोते हुए बच्चे को हसाया जाये
- निदा फाजली
सूरज के हमसफर जो बने हो तो सोच लो
इस रास्ते मे प्यास के दरिया भी आयेगा
- कतील शिफाई
रात के सन्नाटे मे हमने कया कया धोके खाये है
अपना ही जब दिल धडका, तो हम समझे वो आये है
- कतील शिफाई